
जर्जर भवन के कारण दो साल से निजी मकान में संचालित हो रहा था स्कूल, भवन खाली होने के बाद खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर नौनिहाल; ग्रामीणों ने नए भवन की मांग उठाई।
तखतपुर।तखतपुर विकासखंड के स्टेशन पारा स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय से शिक्षा व्यवस्था की बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। यहां स्कूल भवन जर्जर होने के कारण पिछले दो वर्षों से एक निजी मकान में कक्षाएं संचालित की जा रही थीं। लेकिन मकान मालिक द्वारा निजी आवश्यकता के चलते भवन खाली कराकर उसमें ताला लगा दिए जाने के बाद अब मासूम बच्चों की पढ़ाई पेड़ की छांव में हो रही है। खुले आसमान के नीचे लग रही कक्षाओं का वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

जानकारी के अनुसार विद्यालय का भवन लंबे समय से जर्जर स्थिति में है, जिसके चलते बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए वहां पढ़ाई बंद कर दी गई थी। इसके बाद अस्थायी व्यवस्था के तहत निजी मकान में कक्षाएं संचालित कराई जा रही थीं। हालांकि अब निजी मकान भी उपलब्ध नहीं होने से शिक्षक मजबूरी में पेड़ के नीचे बच्चों को पढ़ा रहे हैं।

पेड़ की छांव में बैठकर पढ़ाई कर रहे बच्चों को तेज धूप, उमस और बारिश के मौसम में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। न तो उनके सिर पर पक्की छत है और न ही पढ़ाई के लिए आवश्यक सुविधाएं। ऐसे हालात में नौनिहालों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या से कई बार शिक्षा विभाग और प्रशासन को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। उनका कहना है कि सरकार एक ओर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आधुनिक स्कूलों के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर मासूम बच्चों को पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ाई करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
ग्रामीणों और अभिभावकों ने प्रशासन से तत्काल वैकल्पिक भवन की व्यवस्था करने तथा नए स्कूल भवन के निर्माण की मांग की है। उनका कहना है कि बच्चों के भविष्य के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। यदि जल्द समाधान नहीं किया गया तो वे आंदोलन करने के लिए भी मजबूर होंगे।
तखतपुर की यह तस्वीर सरकारी शिक्षा व्यवस्था के उन दावों की पोल खोल रही है, जिनमें हर बच्चे को बेहतर और सुरक्षित वातावरण में शिक्षा उपलब्ध कराने की बात कही जाती है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इन मासूम बच्चों को पेड़ की छांव से निकालकर फिर से कक्षा की चारदीवारी तक कब पहुंचा पाते हैं।



