
“शौर्य प्रदर्शन एवं भव्य शोभायात्रा ने बांधा समां, समाज की एकता और गौरव का दिया संदेश”
सतनाम भवन में बलिदानी राजा गुरु बालक दास जी की जयंती हर्षोल्लास एवं गरिमामय वातावरण में मनाई गई। कार्यक्रम में समाज के प्रबुद्धजनों, युवाओं एवं बड़ी संख्या में समाजजनों ने सहभागिता कर गुरु बालक दास जी के जीवन, संघर्ष, शौर्य एवं समाज के प्रति उनके योगदान को स्मरण किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ गुरु बालक दास जी के छायाचित्र पर दीप प्रज्वलन एवं पूजन-अर्चन के साथ हुआ। इसके पश्चात समाज के प्रबुद्धजनों द्वारा विचार गोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें गुरु बालक दास जी के जीवन संघर्ष, शौर्य, पराक्रम, दृढ़ता तथा समाज को एकता के सूत्र में बांधने में उनके योगदान पर प्रकाश डाला गया।

इस अवसर पर नगरपालिका सभापति सुनील जांगड़े ने अपने संक्षिप्त उद्बोधन में कहा कि बलिदानी राजा गुरु बालक दास जी का जीवन साहस, त्याग, स्वाभिमान और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है। उन्होंने समाज को संगठित और एकजुट करने के लिए “रावटी” की परंपरा के माध्यम से समाज को एकता के सूत्र में पिरोने का महत्वपूर्ण कार्य किया। उनका जीवन आज भी समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। हमें उनके आदर्शों को आत्मसात कर समाज की एकता, शिक्षा और प्रगति के लिए मिलकर कार्य करना चाहिए।

विचार गोष्ठी के पश्चात डीजे की धुन के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में समाज के अखाड़ा दल द्वारा शौर्य एवं साहस का शानदार प्रदर्शन किया गया, जिसने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। शोभायात्रा सतनाम भवन से मंडी चौक पहुंची तथा वहां से पुनः सतनाम भवन लौटकर कार्यक्रम का समापन हुआ। पूरे मार्ग में समाजजनों में उत्साह एवं उमंग का माहौल रहा।

कार्यक्रम का सफल संचालन राकेश डहरे ने किया। अंत में कर्मचारी संघ अध्यक्ष शशिकांत जांगड़े ने उपस्थित समाजजनों, आयोजन समिति, अतिथियों एवं प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
शोभायात्रा के सफल आयोजन में होरीलाल माथुर, आदर्श बंजारे, प्रियांशु डहरिया, ऋषि चतुर्वेदी एवं शैलेन्द्र आहूजा ने प्रमुख जिम्मेदारी निभाई।
गुरु बालक दास जी की जयंती का यह आयोजन समाज की एकता, गौरव, शौर्य और सामाजिक समरसता का संदेश देते हुए उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से प्रदीप लहरें,सुनील जांगड़े, शशीकांत जांगड़े, राकेश डहरे, डालचंद डाहिरे होरीलाल माथुर, नरेंद्र जांगड़े, के के हिंडोरे, नरेश रात्रे, हीरालाल जांगड़े, सखाराम घृतलहरे, अर्जुन जांगड़े, जलेश्वर कोशले , संतोष खांडे, प्रियांशु डहरिया ,आदर्श बंजारे, ऋषि चतुर्वेदी, शैलेन्द्र आहूजा, सत्यपाल मिरी,अनुराग बंजारे,हेमंत कुर्रे, प्रकाश नवरंग , गोकुल प्रसाद माथुर,जमुना माथुर ,मोती चरण माथुर, राधेलाल माथुर, जितेंद्र माथुर, बल्लू राजा रात्रे ,रमेश बारमते ,मनोज पाटले, यशवंत मिरी, प्रमोद कुर्रे ,जितेंद्र जांगड़े, जैलू बंजारे, संजय माथुर, गुड्डू माथुर, पुन्नी टंडन,मगन टंडन, निखिल खांडे,मनोज रात्रे,करन भारती,अमर माथुर, नरेंद्र माथुर,आयुष कुर्रे,दीपेश लहरें, रोहित दिवाकर, तुषार बंजारे, आलोक आहूजा, दीपक लहरें,गोपी रात्रे, कालेश्वर पात्रे एवं सैकड़ों की संख्या में समाज के लोग शामिल हुए।



